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भारत : शक्ति के साधन

भारत  : शक्ति के साधन
ऊर्जा अथवा शक्ति का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। किसी भी कार्य को करने के लिए जिस प्रकार हमें शक्ति की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार हमारे कृषि सम्बन्धी कार्यों, उद्योग धंधों , परिवहन , यातायात आदि के लिए भी शक्ति का विशेष महत्व है। इन कार्यों के लिए शक्ति जिन संसाधनों से प्राप्त होती है, उन्हें शक्ति के साधन कहते हैं। ये संसाधन दो प्रकार के होते हैं-


परंपरागत ऊर्जा- कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस।
गैर-परंपरागत ऊर्जा- परमाणु, जलविद्युत, पवन,सौर, भूतापीय, ज्वारिय, वायो गैस।

कोयला ( coal)
कोयला एक खनिज पदार्थ है जिसे खानों से प्राप्त कर रेल इंजन निर्माण लौह इस्पात कारखानों आदि में ऊर्जा के रूप में उपयोग किया जाता है।
करोड़ों वर्ष पहले कोयले का निर्माण पेड़ पौधों के अपघटित होकर दलदलों में जमने से हुआ । गर्मी , दबाव, रासायनिक क्रियाओं आदि के फलस्वरूप जीवाश्म से कोयला एवं खनिज तेल बनाया गया। भारत में कोयले का विस्तृत भंडार है। कोयला चार प्रकार का होता है-

1.पीट
2.लिग्नाइट, 
3.बिटुमिनस
4.एन्थ्रासाइट

कहां मिलता है-

यह भारत में झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, असोम, मेघालय, आंध्र प्रदेश, गोवा आदि राज्यों में पाया जाता है।

आर्थिक महत्व

रेल के इंजन, कारखाने, जहाज, रसोई, सीमेंट, उर्वरक, ताप विद्युत केन्द्रों एवं लौह- इस्पात उद्योग।

खनिज तेल (petroleum)
लालटेन/स्टोव , मोटर साइकिल, स्कूटर, पम्पिंग सेंट , इंजन, डीजल रेल इंजन आदि साधनों को हम खनिज तेल से चलाते हैं।
यह खनिज तेल अवशादी शैलों के छिद्रों में पाया जाता है। खानों से निकले तेल को कचरा तेल कहते हैं। खनिज तेल को पानी की तरह सीधे उपयोग नहीं कर सकते , इसलिए खनिज तेल को साफ करने के लिए शोधन शालाएं बनाई जाती हैं।

कहां मिलता है
यह भारत में असोम, मेघालय, गुजरात, मुम्बई- हाई( अरब सागर में), राजस्थान में पाया जाता है।

आर्थिक महत्व
यातायात के साधनों, जहाज, रसोईघरों में, मशीनें चलाने एवं रोशनी करने के लिए भी इसका प्रयोग होता है।

प्राकृतिक गैस
प्राय: प्राकृतिक गैसें खनिज तेल (पेट्रोलियम) के साथ ही कुओं के भीतर प्राप्त होती हैं। ज्यादातर प्राकृतिक गैस क्षेत्र- स्थल एवं महासागर के तलीय भागों में मिलते हैं। यह गैस कुओं से मशीनों द्वारा निकाली जाती है। इसका उपयोग ऊर्जा के रूप में विभिन्न प्रकार से किया जाता है, जैसे गैस चूल्हा, जलाने में, बिजली के उत्पादन में, मोटर इंजन चलाने में।

एक स्थान से दूसरे स्थान तक पाइप लाइन एवं गैस सिलेंडरों द्वारा भेजी जाती है। कोयला, पेट्रोलियम, और प्राकृतिक गैस ऐसे जीवाश्मी शक्ति के साधन हैं, जो अनवीकरणीय होते हैं।इनका अधिक उपयोग करने से निकट भविष्य में इनके समाप्त हो जाने की संभावना है। अतः हमें शक्ति के वैकल्पिक साधनों का अधिक से अधिक प्रयोग सुनिश्चित करना होगा। 

जल विद्युत शक्ति
कोयला की ढुलाई महंगी पड़ती है। खनिज तेल भी देश की मांग एवं खपत से कम उत्पन्न होता है इसलिए देश में जलशक्ति का विकास किया गया है।आपने घर विद्यालय, आस पास छत में लगे बिजली के पंखों को चलते देखा है। इसको मिलने वाली बिजली पहाड़ी एवं उच्च पठारी क्षेत्रों में नदी पर बांध बनाकर पानी को एकत्र किया जाता है। बांध के नीचे बड़े-बड़े पावर हाउस बनाकर जल विद्युत ऊर्जा उत्पन्न की जाती है।

पावर हाउस(Power House 


  • बांध के नीचे बड़े-बड़े पंखें लगाकर उस पर जल को गिराया जाता है।
  • जल विद्युत उत्पादन के लिए टरबाइन की धुरी को पंखों को जोड़ दिया जाता है।
  • पंखों पर जल धारा गिरने से पंखें घूमने लगते हैं।
  • पंखे जितनी तेजी से चलेगेच, बिजली उतनी ही अधिक पैदा होगी क्योकि इन पंखों की धुरी से बिजली पैदा करने वाली मशीन का सम्बन्ध होता है। इस प्रकार उत्पन्न विद्युत को 'जल विद्युत' कहते हैं।
परमाणु ऊर्जा
वैकल्पिक ऊर्जा का एक अन्य स्रोत परमाणु ऊर्जा है। इस ऊर्जा को हम परमाणु नाभिक के विखण्डन से प्राप्त करते हैं, इसलिए इसे परमाणु ऊर्जा कहा जाता है।परमाण ऊर्जा के महत्त्वपूर्ण स्रोत- यूरेनियम, थोरियम जैसे आण्विक खनिज हैं। हमारे देश में झारखंड, मेघालय, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, और राजस्थान में यूरेनियम के भंडार हैं। केरल के तट पर पाई जाने वाली मोनाजाइट बालू से थोरियम प्राप्त किया जाता है। जिसे अणु शक्ति बनाने में उपयोग किया जा सकता है।

भारत में शान्ति पूर्ण प्रयोग के लिए परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की शुरूआत 10 अगस्त 1948 को परमाणु ऊर्जा आयोग की स्थापना हुई। भारतीय वैज्ञानिक डॉ होती जहागीज भाभा के निर्देशन में 1954 में परमाणु ऊर्जा विभाग की स्थापना की गई। परमाणु शक्ति के विकास में भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं डॉ ए. पी. जे. अब्दुल कलाम का योगदान सराहनीय है।

भारत के प्रमुख परमाणु ऊर्जा उत्पादक केन्द्र

तारापुर (महाराष्ट्र)
रावतभाटा  (राजस्थान)
कलपक्कम  (तमिलनाडु)
नरौरा  (उत्तर प्रदेश)
काकरपारा  (गुजरात)
कैगा  (कर्नाटक) 
कुडनकुलम  (तमिलनाडु)

सौर ऊर्जा- सूर्य से प्राप्त होने वाली उष्ममा से जो  शक्ति प््राप््त की 
जा ती है   , उसे सौर्य ऊर्जा कहते हैं। सौर्य ऊर्जा प्राप्त करने के लिए सोलर सेल लगाए जाते हैं।
हम सौर ऊर्जा से कुकर, सोलर लाइट, सोलर हीटर , आदि चलाते हैं। यह स्वच्छ ऊर्जा का स्रोत है। सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता को वर्तमान 4 गीगाबाइट से बढ़कर 100 गीगाबाइट करना भारत जलवायु कार्य योजना 2030 का लक्ष्य है।

पवन ऊर्जा 
भारत के सागर तटवर्ती क्षेत्रों एवं नदियों के किनारों के भागों में जहां तेज और लगातार हवाएं चलती हैं , वहां पवन चक्कियों के समूह लगाकर पवन ऊर्जा का उत्पादन किया जाता है  । भारत पवन उर्जा के उत्पादन में तमिलनाडु अग्रणी राज्य है । इसके अतिरिक्त महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, राज्यों में भी पवन ऊर्जा का उत्पादन किया जा रहा है।          

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