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पर्यावरण से संबंधित महत्वपूर्ण सम्मेलन Environment related Important conferences

1. स्टाकहोम सम्मेलन(अंतराष्ट्रीय मानव पर्यावरण सम्मेलन)


यह पर्यावरण का प्रथम सम्मेलन जो 1972 में  5 जून से 18 जून तक चला । जिसका उद्देश्य "सभी के लिए एक ही पृथ्वी" । इसी सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) का  जन्म हुआ। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम का मुख्यालय केन्या के नैरोबी में बनाया गया। इस सम्मेलन का आयोजन स्वीडन देश में किया गया । इस सम्मेलन को पर्यावरण का मैग्नाकार्टा कहते हैं। तथा  स्टाकहोम सम्मेलन में निम्नलिखित निर्णय लिए गए-


  •  संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की स्थापना मानव विकास एवं पर्यावरण के सम्बन्ध में
  •  विकास और पर्यावरण के मध्य के संघर्षों को कम करने वाले प्रयास 
  • प्रशासनिक और विधायी प्रयासों का क्रियान्वयन।
  • 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाने का निर्णय लिया गया।

2. पृथ्वी सम्मेलन 1 (रियो सम्मेलन )

पृथ्वी सम्मेलन का आयोजन ब्राजील देश के रियो-डि-जेनेरियो शहर में 3 जून 1992 में हुआ। इस सम्मेलन में 172 देशों ने भाग लिया। तथा निम्नलिखित निर्णय लिए गए-

  • पर्यावरण विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग । एजेंडा 21 की स्वीकृति
  • जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) का जन्म।

3. विएना सम्मेलन 

यह सम्मेलन 1985 में ओजोन स्तर का संरक्षण के लिए आस्ट्रिया की राजधानी में आयोजित किया गया। जिस पर ओजोन स्तर पर चर्चा हुई तथा ओजोन संरक्षण के लिए प्रत्येक देश में अलग अलग नियम बनाए गए।

4. मांट्रियल सम्मेलन 

यह सम्मेलन 1987 में ओजोन परतों को बचाने के लिए पहला अंतर्राष्ट्रीय समझौता 16 सितंबर 1987 को हुआ था ।‌‌‌‌‌‌ यह सम्मेलन कनाडा में हुआ। तथा इससे विश्व के सभी देश एक मंच पर आते तथा ओजोन परत संरक्षण के लिए सभी देशों ने अपना योगदान दिया।
तथा इसी दिन से 16 को विश्व ओजोन दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया था।

5. क्योटो सम्मेलन ( क्योटो प्रोटोकॉल)

यह सम्मेलन जापान में 1997 को हुआ। इस सम्मेलन का उद्देश्य ग्रीनहाउस गैसों की पहचान भूमंडलीय तापन को कम करना ,1990 के स्तर में 5% की कटौती।

6. पृथ्वी-2 सम्मेलन (रियो+10 सम्मेलन)/जोहानिसबर्ग सम्मेलन

यह सम्मेलन 2002 में दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में आयोजित किया गया। इस सम्मेलन का उद्देश्य सतत विकास पर विशेष बल देना तथा विश्व एकजुटता कोष की स्थापना पर सहमति।

7. मांट्रियल सम्मेलन

यह सम्मेलन 2005 में हुआ। इस सम्मेलन का उद्देश्य विकसित देशों द्वारा 2012 तक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करके 1990 के स्तर तक लाना।

8. कोपनहेग सम्मेलन

यह सम्मेलन 2009 में हुआ तथा इसका उद्देश्य  विकसित और औद्योगिक राष्ट्र 2020 तक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में भारी कटौती कम कार्बन अर्थव्यवस्था ( Low Carban Economy) की परिकल्पना।

9. रियो + 20 सम्मेलन 2012

प्रथम पृथ्वी सम्मेलन के 20 वर्षो बाद ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में पृथ्वी सम्मेलन सम्पन्न हुआ जिसका नाम रियो + 20 सम्मेलन कहलाया। इसका थीम - हरित अर्थव्यवस्था ( Green Economy) था।

पर्यावरण से संबंधित महत्वपूर्ण सम्मेलन

नायोगा प्रोटोकॉल

नायोगा प्रोटोकॉल के 50 वें अनुसमर्थन मिलने के 90 वें दिन 2 अक्टूबर 2014 से लागू हो गया। उल्लेखनीय यह है कि अक्टूबर, 2012 में हैदराबाद में COP 11 का आयोजन किया गया था। इस प्रोटोकाल के लागू होने से जैवविविधता पर अभिसम के समता वाले प्रावधानों को व्यवहारिक प्ररभाव प्राप्त होगा ।
भारत अपने जेनेटिक संसाधनों और उनसे जुड़े पारम्परिक ज्ञान की चोरी का शिकार रहा है जिन्हें अन्य देशों में पेटेंट करा लिया जाता है।( नीम हल्दी पर कराये गये पेटेंट)।‌ जैव संसाधनों की चोरी रोकने के घरेलू प्रयास के रूप में भारत में जैव विविधता अधिनियम , 2002 लागू किया गया था।
 नायोगा प्रोटोकॉल भारत के घरेलू प्रयासों के पूरक के रूप में कार्य करेगा। ध्यातव्य है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा वर्ष 2010 को जैव विविधता के अंतराष्ट्रीय वर्ष तथा 2011-2020 के  दशक को संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता दशक के रूप में घोषित किया गया।

पेरिस समझौता

फ्रांस की राजधानी पेरिस में 30 नवंबर से 11 दिसंबर, 2015 तक आयोजित जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में विश्व के 196 राष्ट्रो ने आखिर में एक समझौते को स्वीकार कर लिया। इससे पहले यह समझौता 1997 में क्योटो में हुआ था , जो कि विकसित देशों के प्रभाव के कारण कानूनी रूप नहीं ले पाया है।

वर्ष 2014 में लीमा में हुए कोप-20 में सभी देशों ने अपने अपने ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए राष्ट्रीय प्रतिबद्धता जताने का लक्ष्य रखा गया था । 2014 तक पृथ्वी के तापमान में 1 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो चुकी है । अनुमान है कि 2100 तक 2 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो जाएगी।

पेरिस में हुए समझौते ने यदि कानूनी रूप ले लिया तो सभी देशों को बायो फ्यूल ( पेट्रोल, डीजल, कोयला पर आधारित बिजली उत्पादन) बंद करना होगा , उद्यगों में नवीनता ग्रीन तकनीक का प्रयोग करना होगा । समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए 2 अप्रैल 2016 को न्यूयार्क में एक समारोह किया गया था।

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