विश्व में कृषि के विशेष प्रकार Special types of world agriculture


कृषि के विशेष प्रकार

विश्व की वर्तमान कृषि व्यवस्था के बड़े पैमाने की विभिन्न कृषि पद्धतियों के अतिरिक्त कुछ विशेष कृषि प्रकार भी प्रचलित है, जो इस प्रकार है:

विटीकल्चर(Viticulture)  अंगूरों का व्यापारिक स्तर पर उत्पादन विटीकल्चर कहलातीीक है। विटीकल्चर जो अधिकांशतः  दक्षिणी अफ्रीका, भूमध्यसागरीय प्रदेशों के कुछ भागों, दक्षिणी-पश्चिमी संयुक्त राज्य अमरीका तथा ऑस्ट्रेलिया के कुछ क्षेत्रों में की जाती है। अंगूर एक बलवर्द्धक एवं सौन्दर्यवर्धक फल है। अंगूर फल माँ के दूध के समान पोषक है। फलों में अंगूर सर्वोत्तम माना जाता है। यह निर्बल-सबल, स्वस्थ-अस्वस्थ आदि सभी के लिए समान उपयोगी होता है। ये अंगूर की बेलों पर बड़े-बड़े गुच्छों में उगता है।

पिसीकल्चर अथवा जल कृषि (Pisciculture) : व्यापारिक स्तर पर मछली पालन। इस प्रकार की  कृषि  नदियों , तालाबों , पोखरों, तथा समुद्ररो में  की जाती है । भारत में सबसे ज्यादा मछली उत्पादन भााारत के दक्षिण राज्यों में होती है।इसके अंग भोजन हेतु मछलियों को बड़े टैंक या बाड़े में व्यावसायिक रूप से विकसित करना शामिल है। इसे ताजे एवं दोनों में किया जा रहा है।

सेरी कल्चर(Sericulture) : रेशम उत्पाद क्रिया जिसमें शहतूत आदि की कृषि भी सम्मिलित है। इसमें शहतूत के वृक्षों के पत्तों पर रेेेशम के कीड़े को पाला जाता है। यह रेेशम के कीड़ों के लार्वा द्वारा बनाया जाता है। सबसे उत्तम रेशम शहतूत के पत्तों पर पलने वाले कीड़ों के लार्वा द्वारा बनाया जाता है। शहतूत की पत्ती इनका सबसे अच्छा भोजन है। ये लार्वा बढ़कर एक कोश बनाकर उसके भीतर हो जाते हैं। उस समय इन्हें कोया कहते हैं। कोश के भीतर ही यह कीड़ा  निकालता है, जिसे रेशम कहते हैं। कोश के भीतर रहने की अवधि जब पूरी हो जाती है, तब कीड़ा रेशम को काटता हुआ निकलकर उड़ जाता है। इससे कीड़े पालनेवाले निकलने के पहले ही कोयों को गरम पानी में डालकर कीड़ों को मार डालते हैं और तब ऊपर का रेशम निकालते हैं। अगर ऐसा न करें तो यह कीड़ा रेशम काट कर बाहर निकल जायेगा । तथा पूरी रेशम के छोटे छोटे टुकड़े हो जायेंगे जिससे रेशम खराब हो जायेगी। इस प्रकार हमें अच्छी रेशम प्राप्त करने के लिए इस प्रक्रिया को अपनाना चाहिए। जिससे हम एक अच्छी रेशम प्राप्त कर सकते हैं।

हर्टीकल्चर(Horticulture)  ‌: व्यापारिक स्तर पर विभिन्न प्रकार के फलों का उत्पादन। इसे उद्यान विज्ञान भी कहते हैं। हॉर्टिकल्चर विज्ञान की वह शाखा है, जिसमें अनाज, फूलों और पौधों को उगाने से लेकर उनकी मार्केटिंग तक का अध्ययन किया जाता है। ... खाद्य फसलों में फल, सब्जी और अनाज आदि आते हैं, जबकि अखाद्य फसलों के अंतर्गत फूल और पौधे आदि आते हैं।


आरबारी कल्चर(Arboriculture)  : विशेष प्रकार के वृक्षों तथा झाड़ियों की कृषि जिसमें उनका संरक्षण तथा संवर्धन भी शामिल है ।

एपीकल्चर(Apiculture)  :  व्यापारिक स्तर पर शहद उत्पादन हेतु मधु मक्खी या मौन पालन ।

फ्लोरीकल्चर(Floriculture)  : व्यापारिक स्तर पर फूलों की खेती।

सिल्वीकल्चर(Silviculture) : वनों के संरक्षण एवं संवर्धन से सम्बन्धित क्रिया ।

वेजीकल्चर(Vegeculature)  : दक्षिण पूर्वी एशिया में आदि मानव द्वारा  सर्वप्रथम  की गई कृषि।

नेमारीकल्चर( Nemoriculture) : यह भी आदिम व्यवस्था की कृषि है जिसमें मानव द्वारा , जंगलों से फल, जड़ आदि का संग्रह किया जाता था।

ओलेरीकल्चर(Olericulture) : जमीन पर फैलने वाली सब्जियों की व्यापारिक कृषि इसके अंतर्गत आती है।

मेरी कल्चर(Mariculture) : व्यापारिक उद्देश्यों की पूर्ति हेतु समुद्री जीवों के उत्पादन की क्रिया।

हार्सी कल्चर अथवा अश्वपालन(Horsiculture) : सवारी एवं यातायात के लिए उन्नत प्रजाति के घोड़ों एवं खच्चरों का व्यापारिक स्तर पर पालन ।

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