व्यास सम्मान(Vyas samman 2023) हिंदी साहित्य का सर्वोच्च सम्मान है। 2021-2023 के लिए यह सम्मान हिंदी की प्रसिद्ध लेखिका पुष्पा भारती को उनके संस्मरण “यादें, यादें और यादें” के लिए प्रदान किया गया है। यह पुस्तक हिंदी साहित्य के कुछ महान लेखकों के साथ उनकी व्यक्तिगत मुलाकातों और अनुभवों को दर्शाती है।
व्यास सम्मान 2021-2023 (Vyas samman)
इसकी स्थापना 1991में के के बिडला फाउंडेशन के द्वारा की गई। यह पुरस्कार हिन्दी लेखन में 10 वर्षो के उत्कृष्ट साहित्यिक कार्य के लिए दिया जाता है। वर्तमान में इनामी राशि ₹ 4 लाख एवं एक प्रशास्ति पत्र और एक पट्टीका दी जाती है। पहला व्यास सम्मान 1991 में राम विलास शर्मा को उनकी रचना भारत के प्राचीन भाषा परिवार और हिन्दी के लिए दिया गया।
व्यास सम्मान 1991 से अब (2023) तक
| वर्ष | लेखक का नाम | रचना या कृति | विधा |
|---|---|---|---|
| 1991 | राम विलास शर्मा | भारत के प्राचीन भाषा परिवार और हिन्दी | – |
| 1992 | डा. शिव प्रसाद सिंह | नीला चांद | उपन्यास |
| 1993 | गिरजा कुमार माथुर | मैं वक्र के सामने | काव्य |
| 1994 | धर्मवीर भारती | सपना अभी भी | काव्य संग्रह |
| 1995 | कुंवर नारायण | कोई दूसरा नहीं | काव्य संग्रह |
| 1996 | प्रो राम स्वरूप चतुर्वेदी | हिन्दी साहित्य और संवेदना का विकास | – |
| 1997 | केदार नाथ सिंह | उत्तर कबीर तथा अन्य कविताएं | काव्य |
| 1998 | गोविंद मिश्र | पांच आॅगनो वाला घर | उपन्यास |
| 1999 | श्री लाल मिश्र | विसरामपुर का संत | उपन्यास |
| 2000 | गिरिराज किशोर | पहला गिरमिटिया | उपन्यास |
| 2001 | रमेश चंद्र शाह | आलोचना का पक्ष | आलोचना |
| 2002 | कैलाश बाजपेई | पृथ्वी का कृष्ण पक्ष | प्रबन्ध काव्य |
| 2003 | चित्रा मुद्गल | आवां | उपन्यास |
| 2004 | मृदुला गर्ग | कंठ गुलाब | उपन्यास |
| 2005 | चन्द्रकांता | कथा सरितासार | उपन्यास |
| 2006 | परमानंद श्रीवास्तव | कविता का अर्थ | – |
| 2007 | कृष्णा सोबती | समय सरगम | उपन्यास |
| 2008 | मन्नू भंडारी | एक क यह भी | आत्मकथा |
| 2009 | अमर कांत | इन्हीं हथियारों से | – |
| 2010 | विश्वनाथ प्रसाद तिवारी | फिर भी कुछ रह जाएंगे | – |
| 2011 | रामदरश मिश्र | आम के पत्ते | काव्य संग्रह |
| 2012 | नरेंद्र कोहली | न भूतो न भविष्यति | उपन्यास |
| 2013 | विश्वनाथ त्रिपाठी | व्योमकेश दरवेश | संस्मरण |
| 2014 | कमलकिशोर गोयनका | प्रेमचंद की कहानियों का काल क्रमानुसार अध्धयन | – |
| 2015 | डाॅ सुनीता जैन | क्षमा | काव्य |
| 2016 | सुरेंद्र वर्मा | काटना शमी का वृक्ष | – |
| 2017 | ममता कालिया | दुक्खम – सुक्खम | – |
| 2018 | लीलाधर जगूडी | जितने लोग उतने प्रेम | – |
| 2019 | नासिरा शर्मा | कागज की नाव | – |
| 2020 | प्रो शरद पगोर | पाटिलपुत्र की साम्राज्ञी | 30 वां व्यास सम्मान |
| 2021 | असगर वजाहत | महाबली | नाटक (31 वां व्यास सम्मान) |
| 2022 | डा ज्ञान चतुर्वेदी | पागलखाना | – |
| 2023 | पुष्पा भारती | संस्मरण “यादें, यादें और यादें” | – |
33वां व्यास सम्मान, 2023
- कब: 11 दिसंबर, 2023 को
- किसके द्वारा: के. के. बिड़ला फाउंडेशन
- प्रदान किया जाएगा: हिंदी की प्रसिद्ध लेखिका पुष्पा भारती को
- किस पुस्तक के लिए: संस्मरण “यादें, यादें और यादें” के लिए
इस पुस्तक में: माखनलाल चतुर्वेदी, अज्ञेय, महादेवी वर्मा, निराला, राही मासूम रजा, विष्णुकांत शास्त्री, कमलेश्वर, हरिवंशराय बच्चन कवि प्रदीप, धर्मवीर भारती जैसे लेखकों के बारे में परिचय प्राप्त होता है।
- यह पुस्तक प्रकाशित की गई थी: वर्ष 2016 में
- पुरस्कार राशि: 4 लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र तथा स्मृति चिन्ह
- 32वां व्यास सम्मान दिया गया था: डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी उपन्यास ‘पागलखाना’ के लिए
टिप्पणी
- पुष्पा भारती को उनके संस्मरण “यादें, यादें और यादें” के लिए 33वां व्यास सम्मान प्रदान किया गया है। यह पुस्तक हिंदी साहित्य के कुछ महान लेखकों के साथ उनकी व्यक्तिगत मुलाकातों और अनुभवों को दर्शाती है।
- 32वां व्यास सम्मान डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी को उनके उपन्यास “पागलखाना” के लिए प्रदान किया गया था। यह उपन्यास एक पागलखाने में रहने वाले एक व्यक्ति की कहानी बताता है।
पुष्पा भारती के बारे में
पुष्पा भारती हिंदी की प्रसिद्ध लेखिका हैं। उन्होंने कई पुस्तकों की रचना की है, जिनमें उपन्यास, कहानी संग्रह, संस्मरण और रेखाचित्र शामिल हैं। उनकी कुछ प्रमुख कृतियों में “शुभागता”, “ढाई आखर प्रेम के”, “सरस संवाद”, “सफर सुहाने” और “यादें, यादें और यादें” शामिल हैं।
पुष्पा भारती का जन्म 1944 में उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में हुआ था। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने कई वर्षों तक पत्रकारिता में काम किया।
पुष्पा भारती को उनके लेखन के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है, जिनमें व्यास सम्मान, साहित्य अकादमी पुरस्कार और पद्मश्री शामिल हैं।
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धन्यवाद