विश्व जल दिवस 2023 : थीम, महत्व व इतिहास

 

World water day 2023 theme

विश्व जल दिवस 2023

विश्व जल दिवस 1993 से प्रतिवर्ष ‘22 मार्च को विश्व जल दिवस’ मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य जल संकट और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। विश्व जल दिवस 2023 की थीम : ‘जल और स्वच्छता संकट को हल करने के लिए परिवर्तन में तेजी लाना’ है। इस विश्व जल दिवस की शुरुआत है संयुक्त राष्ट्र जल सम्मेलन 2023 न्यूयॉर्क में हो रही है। या सम्मेलन जल संकट और स्वच्छता का हल निकालने के लिए विश्व को एकजुट करने का एक बड़ा अवसर है। वर्ष 2015 में विश्व के देशों ने “2030 एजेंडा” के तहत सतत विकास लक्ष्य (SDG)-6 की पूर्ति के लिए संकल्प लिया था जिसमें वर्ष 2030 तक सभी के द्वारा सुरक्षित जल और स्वच्छता के प्रबंधन का प्रयास शामिल है।

जल की उपयोगिता

जल जीवन का आधार तो है ही साथ ही या जीवन के विभिन्न आयामों से भी संबंधित होता है। जैसे – अर्थशास्त्र, संस्कृति, पर्यावरण व ऊर्जा। जल की उपयोगिता की बात करें तो जल का निम्न लिखित महत्व है-
  1. सभी प्राणियों को भोजन के साथ-साथ जल की भी आवश्यकता होती है।
  2. जल के बिना जीवन असंभव है।
  3. हमारी पृथ्वी का दो तिहाई भाग जल से घिरा है।
  4. जल के बिना जीवन की संकल्पना केवल एक सपना ही है।
  5. जल के माध्यम से है हम अपना सारा काम करते हैं जैसे खाना बनाना कपड़े साफ करना स्नान करना इत्यादि।
  6. जल के बिना इस पृथ्वी पर पेड़ पौधे और अन्य वनस्पतियां का जीवन असंभव है।
  7. धरती के केवल 3 पर्सेंट भाग में ही मीठा जल पाया जाता है।
  8. जल का संरक्षण बहुत ही आवश्यक है। अतः हमें जल को व्यर्थ नहीं करना चाहिए और जल संरक्षण करना बहुत ही आवश्यक है।

वर्तमान में विश्व में जल संकट

विश्व का केवल 3% जल ही ताजा जल है और इसका दो तिहाई हिस्सा जमे हुए ग्लेशियर में पाया जाता है जो मानव के उपयोग के लिए नहीं है। बर्फ 2050 तक 87 देशों में जल संकट की समस्या उत्पन्न होने का अनुमान है। वर्तमान में जल संकट की समस्या से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं। 
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट 2022 के अनुसार दूषित जल और इससे जुड़ी बीमारियों से हर वर्ष 1.4 मिलियन लोगों की मौत होती है और 74 मिलियन लोगों की जिंदगी संकट में है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन 2021 रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान में चार में से एक व्यक्ति स्वच्छ पेयजल की कमी से जूझ रहा है।
  • विश्व में 2.2 अरब लोगों को स्वच्छ जल की अनुपलब्धता है।
  • संयुक्त राष्ट्र विद्यालय रिपोर्ट 2021 के अनुसार वैश्विक स्तर पर 44% घरेलू अपशिष्ट जल का सुरक्षित उपचार नहीं किया जाता है।
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भारत में जल संकट

  • भारत में विश्व की जनसंख्या का 16% है लेकिन भारत के पास विश्व के ताजे जल संसाधनों का केवल 4% ही है।
  • केंद्रीय भूजल बोर्ड 2017 के अनुसार भारत के 700 में से 256 जिलों में भूजल स्तर गंभीर है।
  • भारत विश्व का सबसे बड़ा भू जल उपयोगकर्ता देश है।
  • भारत के तीन – चौथाई ग्रामीण परिवारों की पेयजल तक पहुंच नहीं है और उन्हें असुरक्षित स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है।
  • भारत का लगभग 70 पर्सेंट जल स्रोत दूषित है और प्रमुख नदियां प्रदूषण के कारण सूख रही हैं। भारत के लिए भविष्य में जल एक बहुत बड़ी समस्या के रूप में सामने आ सकता है। अतः जल का उपयोग सीमित करें तथा नदियों नालों को प्रदूषित होने से बचाएं।

भारत में जल संरक्षण से संबंधित योजनाएं –

भारत में उपयुक्त जल प्रबंधन के लिए तथा जल संरक्षण के लिए कुछ पहले शुरू की गई थी जिन का विस्तृत वर्णन नीचे दिया गया है।

1. क्रैच टू रन: राष्ट्रीय जल मिशन – 

इसका उद्देश्य सभी स्थितियों के आधार पर जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल बारिश के पानी को संग्रहित करने के लिए वर्षा जल संचयन संरचना का निर्माण करना है इस अभियान के कार्यान्वयन के लिए प्रभावी प्रचार और सूचना शिक्षा संचार गतिविधियों के माध्यम से जमीनी स्तर पर लोगों को भी शामिल करना है।

2. अटल भू-जल योजना – 

इस योजना की शुरुआत वर्ष 2019 में हुई यह योजना 5 वर्षों की अवधि के लिए चलाई गई थी। इस योजना का उद्देश्य जल प्राथमिकता वाले 7 राज्य गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में जन भागीदारी के माध्यम से भोजन प्रबंधन में सुधार लाना था।

3. राष्ट्रीय जल नीति, 2012 –

इसका एक उद्देश्य नदी के 1 भाग को पारिस्थितिकी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए संरक्षित किया जाना चाहिए। इसके दूसरे उद्देश्य के अनुसार राष्ट्रीय नदी में वर्षभर जल स्तर को बनाए रखने के लिए एक स्थान पर पानी जमा होने से बचाव करना है जिससे नागरिकों को स्वच्छता और स्वास्थ्य की देखभाल के लिए पेयजल की आपूर्ति हो सके।

4. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना – 

यह योजना वर्ष 2015 में शुरू की गई थी। इस योजना में केंद्र और राज्य के हिस्सेदारी 75 अनुपात 25 प्रतिशत जबकि उत्तर पूर्वी क्षेत्र पहाड़ी राज्यों के मामले में हिस्सेदारी 90 अनुपात 10 है। इस योजना का उद्देश्य- क्षेत्रीय स्तर पर सिंचाई में निवेश को बढ़ावा देना तथा सुनिश्चित सिंचाई के तहत खेती योग्य क्षेत्र का विस्तार करना (हर खेत को पानी) है।
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