माइक्रोफाइनेंस क्या है | what is microfinance

 

माइक्रोफाइनेंस क्या है | what is microfinance

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माइक्रोफाइनेंस क्या है (Microfinance kya hai)

हमारी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए माइक्रो फाइनेंस की अवधारणा बहुत ही लाभदायक है हमारे समाज के गरीब पिछड़े वंचित लोगों को इस अवधारणा से अत्यधिक लाभ प्राप्त हो रहा है हमारे समाज के बेहतर वित्तीय स्थिति से ही देश का विकास निर्भर करता है इसे हिंदी भाषा में सूचित किया माइक्रोफाइनेंस कह सकते हैं।
माइक्रो फाइनेंस के अंतर्गत ग्रामीण जनता के विभिन्न जरूरतों को ध्यान में रखते हुए छोटे वित्तीय सुविधाएं प्रदान करने की व्यवस्था की जाती है इसके तहत आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को अपना कामकाज शुरू करने के लिए लोन lone दिया जाते हैं।
भले ही लोन की रकम इसमें छोटी होती है केंद्रीय सुविधा रोजगार उत्पन्न करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित हो रही है विभिन्न विषयों जैसे कृषि डेयरी, पाॅटरी,  टेलरिंग, पाॅल्ट्री, छोटी दुकान पशुपालन या अन्य किसी व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा करने के लिए इस तरह के कर्ज (लोन) का लाभ उठाया जा सकता है।

माइक्रोफाइनेंस संस्थान की कार्यप्रणाली 

माइक्रो फाइनेंस इसके तहत दी जाने वाली रकम भले ही छोटी होती है किंतु यह भी सत्य है कि इसके जरिए ही कामयाबी की राह खोजी गई बड़े बड़े कर्जदार जैसे बड़े बैंक के लिए सिरदर्द बने हुए हैं वहीं दूसरी ओर माइक्रो फाइनेंस कंपनियां प्रत्येक वर्ष कारोबार में वृद्धि कर रही हैं। यह कोई चिटफंड कंपनी नहीं है जो लोगों का पैसा लेकर भाग जाएंगे क्योंकि MFI सिर्फ कर्ज दे सकती है लोगों का पैसा जमा नहीं कर सकती। माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की कार्यप्रणाली पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली सेविंग है इस क्षेत्र में संबंधित वित्तीय संस्थानों द्वारा एक अधिकारी को नियुक्त किया जाता है।
माइक्रो फाइनेंस कंपनी में यह नियुक्त किया गया अधिकारी लोगों के समूह के संपर्क में रहता है और आवेदक की आवश्यकताओं को समझते हुए उसी उदार पर अंतिम रास्ते करता है ऋण लेने वालों को भी माइक्रोफाइनेंस संस्थानों द्वारा निर्धारित की गई कुछ नियमों का पालन करना पड़ता है। वास्तव में माइक्रोफाइनेंस संस्थान उन लोगों के लिए उपयोगी है जिन लोगों की पहुंच बैंक तक नहीं है। इसके जरिए कमाई वाले लोग अपने पैरों पर खड़े होते हैं।
माइक्रोफाइनेंस संस्थानों का काम केवल ऋण देना नहीं होता बल्कि उधार करता के साथ है तब तक नहीं छोड़ते जब तक वह स्वयं अपना कारोबार चलाने के लिए सक्षम नहीं हो जाते यही एक विशेष कारण है कि हमारे देश में जब MICROFINANCE कंपनियों की सफलता दर अधिक है। माइक्रो फाइनेंस संस्थान का पंजीकरण गैर सरकारी संगठन के तौर पर होता है जो कंपनियां अधिनियम के सेक्शन 25 के अधीन होता है इसके द्वारा ऋण देने का मुख्य उद्देश आय सृजन करना है।

भारत की प्रमुख माइक्रोफाइनेंस कंपनियां 

भारत की कुछ प्रमुख शीर्ष माइक्रो फाइनेंस कंपनियां नीचे दी गई हैं।
  • Annapurna microfinance private limited
  • Cashpor micro credit (CMC)
  • Bandhan financial service private limited
  • Aashirwad microfinance private limited
  • Disha microfin private limited
  • Spandana Sphoorty financial limited
  • Asmita microfin limited.
  • Bharat microfinance private limited

Microfinance से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां

  • माइक्रो फाइनेंस कंपनियां सिर्फ कर दे देते हैं पैसा जमा करने के लिए काम नहीं करते।
  • माइक्रो फाइनेंस कंपनियां भारतीय रिजर्व बैंक की देखरेख में काम करती हैं।
  • इसमें कर्ज वापसी साप्ताहिक या मासिक आधार पर किया जाता है।
  • माइक्रोफाइनेंस संस्थान लोगों को वर्तमान बाजार के रुझानों के बारे में शिक्षित करने का कार्य करते हैं जो मार्केट कंपटीशन के लिए लोगों को तैयार करने में सहायक होते हैं।
  • कर्ज लेने वालों को स्वास्थ्य करना पड़ता है कि कर्ज किस कार्य के लिए लिया जा रहा है।
  • इसके तहत कर्ज वंचित आय वर्ग वाले लोगों को दिया जाता है इसमें से अधिकांश लोगों के पास तो बैंक खाता तक नहीं होता है।
  • माइक्रोफाइनेंस संस्थाएं व्यवहारिक रूप से महिलाओं को कर्ज देने का कार्य करती हैं।
  • कोई भी ग्राहक लिए गए ऋण को चुकाने के बाद उदाहरण ले सकता है।
  • एक बात का ध्यान और रहेगी सभी माइक्रोफाइनेंस संस्थाएं एक जैसे काम नहीं करते इनमें से प्रत्येक के कार्य प्रकृति में विभिन्नताएं हो सकती हैं।
  • स्मरण लेने के लिए किसी भी प्रकार की गारंटी नहीं देना पड़ता है।
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निष्कर्ष 

इस प्रकार हमने देखा कि माइक्रो फाइनेंस कंपनियां लोगों के लिए किस प्रकार वरदान सिद्ध हुई हैं। एक ओर जहां माइक्रो फाइनेंस कंपनियां वित्तीय सेवाएं प्रदान करने का कार्य कर रही है वहीं दूसरी ओर गरीब और वंचित वर्ग की मदद करके देश की अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का भी कार्य कर रहे हैं। साथ ही साथ ये कंपनियां लोगों को धन का समुचित उपयोग करने के बाद में भी शिक्षित कर रही हैं।
AFQs

1. माइक्रो फाइनेंस कंपनी का जनक किसे कहा जाता है ?
Ans- विजय महाजन को 

2. भारत में माइक्रोफाइनेंस कंपनी की शुरुआत कब हुई?
Ans- भारत में माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की शुरुआत वर्ष 1956 से मानी जाती है।

3. माइक्रोफाइनेंस कैसे कार्य करती है ?
Ans- माइक्रो फाइनेंस कंपनियां जिन्हें लोन देती हैं। उनका कुछ प्रॉपर्टी जैसे घर मकान सोना चांदी आदि गिरवी रखती हैं।

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