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ऊर्जा के प्राकृतिक एवं वैकल्पिक स्रोत

     ऊर्जा के विभिन्न स्त्रोत Different sources of energy

 

मानव की विभिन्न आवश्यकताओं जैसे- मकान, कपड़ा, भोजन, रेल, सड़क, जल, वायु, परिवहन, संचार, सूचना और प्रसारण एवं अन्य मानव संसाधन के निर्माण एवं उन्हें कार्यकारी बनाने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विकास के फलस्वरूप कारखानों, औद्योगिक संस्थानों में स्थापित मशीनों के संचालन के लिए ऊर्जा आवश्यक है।

1. सूर्य (Sun)

सूर्य से प्राप्त होने वाली ऊष्मा के कारण ही वायु गर्म होकर ऊपर उठती है। आस-पास की वायु द्वारा उसका स्थान लेने के कारण वायु प्रवाह बनता है। अतः वायु ऊर्जा के कारण सूर्य की ऊर्जा ही है। समुद्रों, झीलों व नदियों का जल सूर्य की ऊष्मा से गर्म होकर वाष्प के रूप में ऊपर उठता है जिससे बादलों का निर्माण होता है। ठंडा होने पर बादल वर्षा या हिमपात के रूप में पुनः जल एवं वर्फ के रूप में बदल जाते हैं।

सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा पेड़ - पौधे अपना भोजन बनाते हैं। इस प्रक्रिया में बने यौगिकों में सूर्य की ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा के रूप में संचित हो जाती है । इस प्रकार पेड़ पौधे के विभिन्न भागों में सूर्य की ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा के रूप में संचित रहती है। पेड़ - पौधे हमारे भोजन के स्त्रोत होने के कारण परोक्ष में सूर्य हमारे भोजन से प्राप्त होने वाली ऊर्जा का मुख्य स्त्रोत है। लकड़ी एवं गोबर के अंडे भी ऊर्जा के स्त्रोत हैं। सूर्य से प्रकाश के साथ साथ ऊष्मीय ऊर्जा भी प्राप्त होती है। हवाओं का चलना या वर्षा का होना सूर्य की ऊर्जा (सौर ऊर्जा) के कारण सम्भव है।

2. ईंधन (Fuel)

जो पदार्थ दहन की क्रिया द्वारा ऊर्जा प्रदान करते हैं, ईंधन कहलाते हैं। दहन क्रिया द्वारा ईंधन, ऊष्मा एवं प्रकाश उत्पन्न करते हैं। लकड़ी जन्तुओं के गोबर के कंडे, कोयला, मिट्टी का तेल, पेट्रोल, डीजल, द्रवित पेट्रोलियम गैस, बायोगैस आदि ईंधन के उदाहरण हैं। कोयला एक परम्परागत ईंधन है। शहरों में भोजन पकाने के लिए गैस (एल.पी.जे.) का प्रयोग किया जाता है। सभी प्रकार के ईंधन ऊर्जा के स्रोत हैं।

3. विद्युत ऊर्जा (Electric energy)

विद्युत ऊर्जा का प्रयोग कारखानों में, मशीनों को चलाने में, पंखा, फ्रिज, टीवी, कूलर, आदि में विद्युत ऊर्जा का प्रयोग किया जाता है। विभिन्न प्रकार के पावर प्लांट के माध्यम से विद्युत ऊर्जा का उत्पादन किया जाता है।
  • ताप विद्युत पावर प्लांट
  • जल विद्युत पावर प्लांट
  • नाभिकीय ऊर्जा पावर प्लांट
ये विद्युत पावर प्लांट  विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए विभिन्न प्रकार की ऊर्जा उपयोग करते हैं। इनमें कोयले तथा डीजल की रासायनिक ऊर्जा, बहते जल तथा पवन की गतिज ऊर्जा, नाभिकीय विखण्डन से उत्पन्न ऊर्जा जैसे ऊर्जा स्त्रोतों का उपयोग करते हैं।

आधुनिक प्रोद्योगिकी संस्थानों में विभिन्न प्रकार की मशीनों को चलाने में, रेलगाड़ी के इंजन चलाने में, कृषि सिंचाई के लिए उपयोग में लाने वाले नलकूप मोटरों में तथा में तथा सूचना प्रौद्योगिकी की विभिन्न मशीनों को चलाने में शामिल
विद्युत ऊर्जा का उपयोग करतें हैं। 

5. बायोगैस (Biogas)

जीव जंतुओं के अवशेष पदार्थों, मल-मूत्र, गोबर, कूड़ा-करकट में रासायनिक ऊर्जा संचित होती है। गोबर को सुखाकर उसे जलाने से मुख्यत ऊष्मा के रूप में ऊर्जा उत्पन्न होती है। तथा धुआं भी अधिक मात्रा में उत्पन्न होता है, जिससे वायुमंडल में प्रदूषण भी बढ़ता है। अतः कंडो का उपयोग तथा सम्भव कम किया जाना चाहिए।

गोबर से ऊर्जा प्राप्त करने का दूसरा साधन गोबर गैस प्लांट है। गोबर गैस प्लांट से उत्पन्न गैस बायोगैस कहलाती है इसका उपयोग भोजन पकाने, सड़क के किनारे व घरों में प्रकाश उत्पन्न करने व इंजन चलाने के लिए ईंधन के रूप में बायोगैस का उपयोग किया जाता है। भारत में बहुत अधिक संख्या में बायोगैस संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं।गोबर, मल-मूत्र व कृषि अनुपयोगी पदार्थों का उपयोग बायोगैस उत्पन्न करने में किया जाए तो अधिकतम गांवों में ऊर्जा की कमी पूर्ती सम्भव हो सकती है।

वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के उपयोग (Uses of alternative energy sources)

परम्परागत ऊर्जा स्त्रोतों के रूप में कोयला एवं पेट्रोलियम उत्पादों का उपयोग बहुत अधिक मात्रा में किया जा रहा है। इनके भंडार सीमित है। हमारे देश में कोयले के भंडारों के लगभग 250 सालों के पश्चात समाप्त होने की सम्भावना है। पुनः प्राप्त हो सकने वाले ऊर्जा स्त्रोतों के अत्यधिक उपयोग से ऊर्जा संकट को हल किया जा सकता है। अतः पुनः प्राप्त हो सकने वाले (वैकल्पिक) ऊर्जा के स्त्रोत का विकास अपरिहार्य है। वैकल्पिक ऊर्जा के स्त्रोत सौर ऊर्जा, गतिमान वायु, जल, समुद्री ज्वार भाटा, जैव मात्रा (बायोमास) वैकल्पिक ऊर्जा के कुछ स्रोत हैं। वैकल्पिक ऊर्जा प्राप्त करने की निम्न लिखित युक्तियां हैं-

  • सोलर कुकर (Soler kukar)
  • सौर सेल (सोलर सेल) (Soler sell)
  • सौर जल ऊष्मक (Solar water heater)
  • पवन चक्की ( Wind mill)
  • जल विद्युत संयंत्र (Hydropower plant)

 1. सोलर कुकर (Solar cooker)
सोलर कुकर द्वारा सौर ऊर्जा को ऊष्मा के रूप में एकत्रित करके इसे भोजन पकाने में प्रयोग किया जाता है। इस में सूर्य की प्रकाश किरणें कुकर के कांच के ढक्कन तथा परावर्तक पर पड़ती हैं। कांच के ढक्कन पर तथा परावर्तक से परावर्तित हो कर आने वाली प्रकाश किरणें बाक्स में रखे बर्तन C1, C2  तथा उसकी भीतरी दीवारों पर पड़ती हैं। बर्तन की बाहरी सतह पर बाक्स की दीवारेंव तली सभी काले रंग की होती है , जिससे सूर्य की ऊर्जा को अवशोषित कर लिया जाता है। परिणामस्वरूप बाक्स के अन्दर का ताप बढ़ जाता है। दो, तीन घंटों में इसके अन्दर रखा खाना पक जाता है। सोलर कुकर की सहायता से चपाती बनाने और फ्राई करने के अतिरिक्त सभी प्रकार के भोजन पकाये जा सकतें हैं।
सोलर कुकर
सोलर कुकर
2. सौर सेल (Solar cell) 
सौर सेल वह युक्ती है, जिससे सूर्य की प्रकाश ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है। सौर सेल में सिलिकॉन प्रयोग करते हैं। एक सोलर सेल लगभग 0.5 वोल्ट का विभवान्तर तथा 0.6 ऐम्पियर की विद्युत धारा उत्पन्न कर सकता है। एक अधिक विद्युत धारा प्राप्त करने के लिए अधिक संख्या में सोलर सेलों को जोड़ा जाता है जिसे सोलर पैनल कहते हैं। सोलर पैनल द्वारा प्रकाश ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है। प्राय सौर पैनलों दर्शाया उत्पादित विद्युत का उपयोग बैटरी चार्ज करने के लिए किया जाता है। बैटरी से आवश्यकतानुसार विद्युत का उपयोग बल्व जलाने एवं रेडियो, टीवी. तथा जल पम्प आदि चलाने में किया जाता है। दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में जहां विद्युत उपलब्ध नहीं है, सोलर पैनल का उपयोग विशेष रूप से किया जाता है।
सोलर सेल
सोलर सेल

3. सौर जल ऊष्मक (Solar water heater)
इसमें कांच के बाॅक्स के अन्दर तांबे की ट्यूब लगा दी जाती है इसकी बाहरी सतह को काला कर दिया जाता है जिससे ऊष्मा का अधिक अवशोषण हो सके । सूर्य का प्रकाश इसी ट्यूब पर पड़ता है। इस ट्यूब के एक सिरे से ठंडा जल प्रवेश करता है तथा दूसरे से गर्म जल निकलता है इसका उपयोग अस्पतालों वाले होटलों में किया जाता है । अन्य डिजाइन के सौर ऊष्मक भी विकसित गये हैं । ऐसे ही एक सौर-ऊष्मक द्वारा अनाजों, फलों एवं सब्जियों को सुखाया जाता है।
सौर जल उष्मक
सौर जल उष्मक


4. पवन चक्की (wind mill)
वायु के गतिशील होने से उत्पन्न गतिज ऊर्जा को पवन ऊर्जा कहते हैं। इसका उपयोग पवन चक्की के ब्लेडो को घुमाने में किया जाता है। पवन चक्की के द्वारा जल पम्प और आटा चक्की चलाई जाती है।
  1. यह अपने देश में तमिलनाडु एवं गुजरात प्रदेशों में पवन ऊर्जा पर आधारित विण्ड मिल फार्म द्वारा विद्युत ऊर्जा का उत्पादन किया जा रहा है।
  2. रिहन्द (उ.प्र.), भाखड़ा नांगल (पंजाब) एवं टिहरी (उत्तराखंड) में जल द्वारा विद्युत उत्पन्न करने के संयंत्र स्थापित किये गये हैं। 
जल से ऊर्जा का निर्माण कैसे होता है ?
बहते हुए जल में गतिज ऊर्जा होती है।इस गतिज ऊर्जा को जल विद्युत संयंत्र द्वारा विद्युत ऊर्जा में बदला जाता है। इस प्रकार बहता हुआ जल, ऊर्जा का स्त्रोत है। नदियों पर बांध बनाकर अत्यधिक मात्रा में पानी को एकत्रित किया जाता है। अधिक ऊंचाई से इसे टरबाइन की पंखुड़ियों पर गिराया जाता है जिससे तेजी से घूमने लगती है। टरबाइन के घूमने से उससे जुड़े जनित्र से विद्युत ऊर्जा उत्पन्न की जाती है। विद्युत संचार तारों की सहायता से उत्पन्न विद्युत ऊर्जा को गांवों, शहरों एवं कस्बों में भेजा जाता है।

गोबर गैस प्लांट से विद्युत ऊर्जा कैसे बनती है ?
इसमें विशेष प्रकार के संयंत्र में विघटन कर ऊर्जा के एक स्रोत बायोगैस का उत्पादन किया जाता है। गोबर में संचित रासायनिक ऊर्जा को बायो गैस में बदलने का कार्य गोबर गैस प्लांट में किया जाता है।
गोबर गैस प्लांट
गोबर गैस प्लांट


इसमें चित्र अनुसार मिक्सिंग टैंक में गोबर को जल में मिलाकर पाचक टैंक में डाला जाता है। इससे मेथेन और कार्बन डाइऑक्साइड के मिश्रण युक्त गैस उत्पन्न होती है। इस गैस को गोबर गैस कहते हैं। इसके अतिरिक्त इसमें हाइड्रोजन सल्फाइड तथा हाइड्रोजन गैस भी अल्प मात्रा में बनती है। गैस प्लांट के शेष अपशिष्ट पदार्थ कम्पोस्ट खाद के रूप में प्रयोग किये जाते हैं।

नाभिकीय ऊर्जा, ऊर्जा का कैसा स्त्रोत है ?
किसी परमाणु का द्रव्यमान उसके सघन नाभिक में होता है। इसी परमाणु की अधिकांश ऊर्जा भी होती है। जब किसी भारी परमाणु (यूरेनियम) का नाभिक हल्के (बेरियम तथा क्रिप्टन) नाभिकों में टूटता है, तो अत्यधिक परिमाण में ऊर्जा मुक्त होती है। इस प्रक्रम को विखण्न कहते हैं। नाभिक के विखण्डन से प्राप्त ऊर्जा को नाभिकीय ऊर्जा कहते हैं ‌
परमाणु भट्ठी
परमाणु भट्ठी


नाभिकीय भट्ठी में नियन्त्रित दर पर परमाणु ऊर्जा प्राप्त होती है जिसका उपयोग विद्युत उत्पादन के लिए नाभिकीय पावर प्लांट में किया जाता है। परमाणु भट्ठी में नाभिकीय विखण्डन से उत्पन्न ऊष्मा से जल गर्म करके भाप बनाई जाती है। उच्च दाब की भाप से टरबाइन चलाई जाती है जो विद्युत जनित्र से जुड़ी होती है। जनित्र विद्युत उत्पादित कर नाभिकीय ऊर्जा को अनन्तः ऊर्जा में परिवर्तित कर देता है। परमाणु भट्ठी में परमाणु विखण्डन की क्रिया नियन्त्रित होती है। नाभिकीय भट्ठी से उत्पन्न ऊर्जा बहुत अधिक समय तक चलने वाला ऊर्जा का स्त्रोत है।
वर्तमान में भारत में कलपक्कम (तमिलनाडु), तारापुर (महाराष्ट्र), कोटा (राजस्थान) और नरौरा (उत्तर प्रदेश) में नाभिकीय ऊर्जा घर स्थापित हैं।


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